Radiation Technology in agricultural university will be useful for new species of yellow mustard, three times more yields


कृषि विवि में विकिरण से पीले सरसों की नई प्रजाति की जा रही तैयार, तीन गुना बढ़ेगी पैदावार

A new species of yellow mustard is being developed through irradiation these days at Indira Gandhi Agricultural University. It is being told that if all is well, then yellow mustard yield will be three times higher. This information was given by Rajaraman Fellow DAE and Secretary of Atomic Energy Education Society, Swatanesh Malhotra, who reached the three-day seminar organized jointly by the Chhattisgarh Culture Department and Bhabha Atomic Research Center in Mahant Ghasidas Museum. He said that for three years, research has been on to increase the production of mustard seed. On the second day of the program Dr. GR Aarsal said that transfer technology developed by Bhabha Center can be used in agriculture, health and water purifiers. If the use of spin technology is used in the field of agriculture, then better yield and higher yield can be obtained. At the same time he told that the farmers of Chhattisgarh will soon get the opportunity to use transferred technology. Its complete setup is being prepared in Raipur Engineering College, which will prove to be helpful in the agricultural sector.

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में इन दिनों विकिरण के माध्यम से पीले सरसों की नई प्रजाति विकसित की जा रही है। बताया जा रहा है कि अगर सब कुछ सही रहा तो पीले सरसों की पैदावार तीन गुना ज्यादा होगी। इसकी जानकारी महंत घासीदास संग्रहालय में छत्तीसगढ़ संस्कृति विभाग और भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय संगोष्ठी में शामिल होने पहुंचे राजारामन फेलो डीएई और एटॉमिक एनर्जी एजुकेशन सोसायटी के सेक्रेटरी स्वप्नेश मल्होत्रा ने दी। उन्होंने बताया कि तीन वर्ष से सरसों की पैदावार बढ़ाने रिसर्च चल रहा है। कार्यक्रम के दूसरे दिन डॉ. जीआर उर्सल ने बताया कि भाभा केंद्र द्वारा विकसित हस्तांतरण टेक्नोलॉजी का उपयोग कृषि, हेल्थ और वाटर प्यूरीफायर में किया जा सकता है। कृषि के क्षेत्र में स्पिन टेक्नोलॉजी का यूज कर हस्तांतरण किया जाए तो बेहतर किस्म और ज्यादा उपज प्राप्त की जा सकती है। वहीं उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ के किसानों को जल्द ही हस्तांतरित टेक्नोलॉजी का उपयोग करने का मौका मिलेगा। रायपुर इंजीनियरिंग कॉलेज में इसका पूरा सेटअप तैयार किया जा रहा है, जो कृषि क्षेत्र में मददगार साबित होगा।

Accelerator Technology Devleep Getting - Associate Director of Bhabha Technical Development Group, RK Rajawat, said that soon the Accelerator Technology Develap will be held. This will prevent the pollution from the factory. This technology will be used in the purity of water.

एक्सीरेलेटर टेक्नोलॉजी हो रही डिवेलेप - भाभा टेक्निकल डिवेलपमेंट ग्रुप के एसोसिएट डायरेक्टर आरके राजावत ने बताया कि जल्द ही एक्सीरेलेटर टेक्नोलॉजी डिवेलेप होगी। इससे फैक्टरी से होने वाले प्रदूषण को रोका जा सकेगा। पानी की शुद्धता में इस टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जाएगा।

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