इंदौर संभाग में बीते 2 सालों में 266 किसान दे चुके हैं जान


In last two years in Indore division, 266 farmers have given their life.

कांग्रेस विधायक बाला बच्चन ने प्रश्नकाल में बीते दो वर्षो में इंदौर संभाग में किसानों व खेतिहर मजदूरों की आत्महत्या संबंधी सवाल पूछा। इस सवाल के लिखित जवाब में गृहमंत्री सिंह ने बताया कि गृह विभाग द्वारा किसान व कृषक मजदूरों की आत्महत्या के आंकड़े विशिष्ट रूप से संकलित नहीं किए जाते। अस्वाभाविक मौतों की जांच में पाया गया कि इंदौर में बीते दो वर्षो में 266 व्यक्तियों ने आत्महत्या की, जिनका व्यवसाय कृषि था।

उन्होंने बताया कि आत्महत्या करने वालों में से चार किसानों ने कर्ज चुकाने में असमर्थता के चलते आत्महत्या कर ली। दो किसानों ने सुसाइड नोट भी छोड़ा, जिसमें कर्ज बकाया होने का जिक्र है। वहीं एक किसान ने बिजली बिल के बकाया होने के चलते आत्महत्या कर ली, मगर उसका सुसाइड नोट नहीं मिला है।

सरकार की ओर से जारी एक जनवरी, 2015 से 15 फरवरी, 2017 तक का आंकड़ा बताता है कि इस अवधि में 450 किसानों और मजदूरों ने आत्महत्या की है। झाबुआ में सबसे ज्यादा 128 किसानों ने आत्महत्या की। धार जिले में 127 और खरगोन में 103 किसानों ने जान दे दी।


Congress MLA Bala Bachchan asked questions related to suicides of farmers and agricultural laborers in Indore division in last two years during Question Hour. In a written reply to the question, Home Minister Singh said that the statistics of suicide of farmer and farm laborers by the Home Department have not been specifically compiled. Investigation of the untimely deaths found that 266 persons committed suicide in Indore in the last two years, whose business was agriculture.

They said that four of the farmers who committed suicide committed suicide because of their inability to pay the debt. Two farmers also left the suicide note, in which the loan was refunded. One farmer committed suicide due to the dues of electricity bill, but his suicide note was not found.

The figures from the government released from January 1, 2015 to 15 February 2017 show that during this period, 450 farmers and laborers committed suicide. Jhabua has the highest number of 128 farmers suicidal. In Dhar district, 127 farmers and Khargone 103 farmers died.

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